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Koi samjhae Ki Hume hua Kya he Na samajh dard e dil ki dawa Kya he Kab tak Tarsegi meri aankhe Tere Deedaar Ke Lie Ae khuda tu hi bata...
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फरिश्तों का इश्क़ मुकम्मल हुआ हो शायद इंसान आज भी तरसता हे मोहोब्बत पाने के लिए चंद खुशनसीब को नसीब हुई हो वो बारिश शायद हज़ारों तैयार बै...
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इक मुद्दत से तेरी याद न आए और तुझे भूल जाऊं में ऎसा भी नहीं दिल को मेरे चिर के देख कोई और बसा मिलजाए में ऎसा भी नहीं मगर हो तेरी आँ...
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छोड़ के मुझे वो खुश हे तो फिर शिकायत कैसी उन्हें खुश भी न देख पाऊं तो फिर मोहोब्बत कैसी दिल और जान तो हम कबका करचुके तेरे नाम जान लेन...
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यूँ ही रंजिशों में गुज़रते रहे वो पल कभी तू खफा तो कभी में चाहतों के मोड़ भी आते जाते रहे न कभी तू रुका न कभी में बस आग ही आग जल्ति रही दि...
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आज फिर तनहा में बैठा , तुम साथ मेरे चल न पाओगे मे हु मजनू तेरा अंदाज़ हे ज़माने वाला ,तुम साथ मेरे चल न पाओगे ये माना तुम्हे भी इश्क़ हे हमसे ...
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खूब थे वो बचपन के दिन जहां सुन्दर सपना दीखता था जहां भी जाती मेरी नज़र वहां सब अपना सा दीखता था डगमगाती हे कलम मेरी अब दुनिया की इस ...
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तेरी ही ज़ुबां में, तेरे ही जुनून में, तेरी हर अदा में इश्क़ है... मख़मली जवाँ तेरी साँसों में इश्क़ है । दिवाना-ए-आब हर झंकार में इश्क...
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आज फिर तनहा में बैठा, तुम साथ मेरे चल न पाओगे मे हु मजनू तेरा अंदाज़ हे ज़माने वाला ,तुम साथ मेरे चल न पाओगे ये माना तुम्हे भी इश्क़ हे ह...
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आज अंधेरों मे मुझे कहीं ख़ोजाने दे सुकूं हे इन रेतों में, मुझे यहीं सोजाने दे मुम्किन नहीं सनम इस भीड़ में जीना मुझे अब तन्हाईओं का ही होज...
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2015
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September
(9)
- छोड़ के मुझे वो खुश हे
- आज फिर तन्हा में बैठा, तुम साथ मेरे चल न पाओगे
- फरिश्तों का इश्क मुकम्मल हुआ हो शायद
- तुमने कभी इश्क़ न किया दिल से न कभी कोशिश भी की निभ...
- इक मुद्दत से तेरी याद न आए और तुझे भूल जाऊं में ऎस...
- खूब थे वो बचपन के दिन जहां सुन्दर सपना दीखता था
- तेरी सख़्तियों में भी एक राहत सी हे
- Today, sitting in the sequestered
- Today, in the shadow give me somewhere Khojane
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September
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