यूँ ही रंजिशों में गुज़रते रहे वो पल कभी तू खफा तो कभी में चाहतों के मोड़ भी आते जाते रहे न कभी तू रुका न कभी में बस आग ही आग जल्ति रही दिलों में न कभी तू बुझा न कभी में न जाने वो कैसा मंज़र था आज़माइशों का न कभी तू झुका न कभी में अपनी अपनी ज़िद्द पे अड़े रहे मगर न हुआ तू जुदा न कभी में Written By: *JN Mayyaat*
Wednesday, 7 October 2015
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